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FD vs RD: फिक्स्ड डिपॉजिट और रिकरिंग डिपॉजिट में क्या फर्क है?

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Admin·Apr 1, 2026
FD vs RD: फिक्स्ड डिपॉजिट और रिकरिंग डिपॉजिट में क्या फर्क है?
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FD vs RD: फिक्स्ड डिपॉजिट और रिकरिंग डिपॉजिट में क्या फर्क है? alt text

परिचय

जब भी बचत और सुरक्षित निवेश की बात आती है, तो सबसे पहले जो दो नाम जेहन में आते हैं वो हैं फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD)। ये दोनों ही बैंकों और पोस्ट ऑफिस द्वारा दी जाने वाली पारंपरिक और भरोसेमंद बचत योजनाएं हैं, जिन्हें भारत में दशकों से पसंद किया जाता रहा है। दोनों ही तय ब्याज दर देते हैं, दोनों में जोखिम लगभग ना के बराबर होता है, और दोनों ही उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं जो शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर सुरक्षित तरीके से पैसा बढ़ाना चाहते हैं।

लेकिन FD और RD एक जैसे दिखने के बावजूद इस्तेमाल के तरीके, निवेश की प्रक्रिया और किसके लिए ये उपयुक्त हैं, इस मामले में काफी अलग हैं। इस लेख में हम दोनों को विस्तार से समझेंगे और जानेंगे कि आपकी जरूरत के हिसाब से कौन सा विकल्प बेहतर रहेगा।

FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट क्या है?

फिक्स्ड डिपॉजिट एक ऐसी निवेश योजना है जिसमें आप एक बार में एकमुश्त (lump sum) राशि बैंक या पोस्ट ऑफिस में एक तय अवधि के लिए जमा करते हैं। इस दौरान आपके पैसे पर एक निश्चित ब्याज दर मिलती है, जो निवेश के समय ही तय हो जाती है और पूरी अवधि तक स्थिर रहती है।

उदाहरण के लिए, अगर आप ₹1 लाख की FD 5 साल के लिए 7% ब्याज दर पर करवाते हैं, तो आपको ठीक-ठीक पता होता है कि मैच्योरिटी पर कितनी रकम मिलेगी।

FD की अवधि आमतौर पर 7 दिन से लेकर 10 साल तक हो सकती है, यानी यह बेहद छोटी अवधि से लेकर लंबी अवधि तक, दोनों तरह के निवेशकों के लिए उपयुक्त है।

RD यानी रिकरिंग डिपॉजिट क्या है?

रिकरिंग डिपॉजिट एक ऐसी योजना है जिसमें आप एक बार में बड़ी रकम जमा करने के बजाय, हर महीने एक तय राशि जमा करते हैं। यानी यह एक तरह से अनुशासित मासिक बचत की आदत डालने वाला उत्पाद है।

उदाहरण के लिए, अगर आप हर महीने ₹5,000 की RD 3 साल के लिए शुरू करते हैं, तो आपको हर महीने की तय तारीख तक यह राशि जमा करनी होती है। RD पर भी FD जैसी ही एक निश्चित ब्याज दर मिलती है, और मैच्योरिटी पर आपको जमा की गई पूरी राशि ब्याज सहित एक साथ मिल जाती है।

RD खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनके पास एक साथ बड़ी रकम निवेश करने के लिए नहीं होती, लेकिन जो हर महीने की सैलरी या आय में से एक तय हिस्सा बचाना चाहते हैं।

FD और RD में बुनियादी फर्क

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ब्याज दर की तुलना

ज्यादातर बैंकों में FD और RD की ब्याज दरें लगभग बराबर होती हैं, क्योंकि दोनों ही एक जैसी अवधि के फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट हैं। हालांकि असल फर्क इस बात में है कि ब्याज की गणना कैसे होती है।

FD में चूंकि पूरी राशि शुरुआत से ही जमा होती है, इसलिए पूरी अवधि के लिए पूरी रकम पर ब्याज मिलता है। इस वजह से कुल मिलने वाला ब्याज ज्यादा नजर आता है।

RD में हर महीने की किस्त अलग-अलग समय पर जमा होती है। पहले महीने में जमा की गई राशि को पूरी अवधि का ब्याज मिलता है, लेकिन आखिरी महीने में जमा की गई राशि को सिर्फ एक महीने का ही ब्याज मिलता है। इसलिए भले ही ब्याज दर एक जैसी हो, कुल मिलने वाला ब्याज FD के मुकाबले RD में अपेक्षाकृत कम होता है — क्योंकि RD में औसतन आपका पैसा कम समय के लिए जमा रहता है।

ज्यादातर बैंक वरिष्ठ नागरिकों (senior citizens) को FD और RD, दोनों पर सामान्य दर से थोड़ी ज्यादा ब्याज दर देते हैं, आमतौर पर 0.25% से 0.75% तक अतिरिक्त।

निवेश की न्यूनतम राशि

FD: ज्यादातर बैंकों में न्यूनतम ₹1,000 से FD शुरू की जा सकती है, हालांकि यह बैंक-दर-बैंक अलग हो सकती है।

RD: RD की न्यूनतम मासिक किस्त आमतौर पर ₹100 से ₹500 तक हो सकती है, जिससे यह छोटे निवेशकों और विद्यार्थियों के लिए भी सुलभ हो जाती है।

लिक्विडिटी और समय से पहले निकासी

FD और RD दोनों में ही समय से पहले पैसा निकालने (premature withdrawal) की सुविधा होती है, लेकिन इसके लिए आमतौर पर पेनल्टी (जुर्माना) देना पड़ता है, जो ब्याज दर में कटौती के रूप में लगाई जाती है।

FD में आंशिक निकासी की सुविधा कुछ बैंकों में मिलती है, यानी आप पूरी राशि निकाले बिना उसका एक हिस्सा निकाल सकते हैं। RD में यह सुविधा आमतौर पर उपलब्ध नहीं होती — या तो आप RD जारी रखें या पूरी तरह बंद करें।

इसके अलावा, दोनों ही योजनाओं में FD/RD के बदले लोन लेने की सुविधा भी मिलती है, जिसमें जमा राशि पर एक तय सीमा तक लोन मिल सकता है, बिना अपनी जमा राशि तोड़े।

टैक्स से जुड़े पहलू

FD और RD दोनों से मिलने वाला ब्याज "अन्य स्रोतों से आय" (Income from Other Sources) के तहत टैक्स योग्य होता है, और यह आपकी कुल आय में जुड़कर आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स के दायरे में आता है।

अगर किसी वित्तीय वर्ष में FD या RD से मिलने वाला कुल ब्याज एक तय सीमा से ज्यादा हो जाता है, तो बैंक स्रोत पर कर कटौती (TDS) काटता है। यह सीमा सामान्य नागरिकों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग-अलग होती है, और समय-समय पर बदलती भी रहती है, इसलिए निवेश से पहले नवीनतम नियम जरूर जांच लें।

एक खास बात यह है कि पांच साल की "टैक्स सेविंग FD" धारा 80C के तहत टैक्स छूट देती है, लेकिन सामान्य RD में ऐसी कोई सीधी टैक्स छूट उपलब्ध नहीं है। यानी अगर आपका मकसद टैक्स बचाना भी है, तो सामान्य FD या RD के बजाय खासतौर पर "टैक्स सेविंग FD" का विकल्प चुनना होगा।

FD के फायदे

  • पूरी रकम पर तुरंत ब्याज — निवेश की शुरुआत से ही पूरी राशि पर ब्याज मिलना शुरू हो जाता है।
  • एकमुश्त बड़ी रकम के लिए उपयुक्त — अगर आपके पास अचानक कोई बड़ी राशि आ गई हो, जैसे बोनस या इंश्योरेंस क्लेम, तो FD एक अच्छा पार्किंग विकल्प है।
  • लचीली अवधि — 7 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि में से चुनने का विकल्प।
  • टैक्स सेविंग विकल्प भी उपलब्ध — 5 साल की टैक्स सेविंग FD से 80C छूट मिलती है।
  • FD के नुकसान

  • एक बार में बड़ी रकम चाहिए, जो हर किसी के पास नहीं होती।
  • समय से पहले निकासी पर ब्याज दर में कटौती होती है।
  • महंगाई के मुकाबले रिटर्न सीमित हो सकता है।
  • RD के फायदे

  • अनुशासित बचत की आदत — हर महीने एक तय राशि जमा करने से बचत की आदत मजबूत होती है।
  • छोटी राशि से शुरुआत संभव — बड़ी रकम की जरूरत नहीं, थोड़ी-थोड़ी बचत से भी निवेश शुरू हो सकता है।
  • सैलरीड लोगों के लिए उपयुक्त — मासिक आय में से एक तय हिस्सा अलग रखने का आसान तरीका।
  • लक्ष्य आधारित बचत — किसी छोटी अवधि के लक्ष्य के लिए, जैसे छुट्टियों की योजना या त्योहार के खर्च के लिए, RD एक बेहतरीन साधन है।
  • RD के नुकसान

  • हर महीने किस्त जमा करने का अनुशासन बनाए रखना जरूरी है, वरना पेनल्टी लग सकती है।
  • FD के मुकाबले कुल मिलने वाला ब्याज अपेक्षाकृत कम होता है।
  • आंशिक निकासी की सुविधा आमतौर पर नहीं मिलती।
  • सीधी टैक्स छूट उपलब्ध नहीं है।
  • किसके लिए कौन सा विकल्प बेहतर है?

    FD चुनें अगर:

  • आपके पास निवेश के लिए एकमुश्त बड़ी रकम पहले से मौजूद है।

  • आप एक तय अवधि के लिए अपनी पूंजी को सुरक्षित रखना चाहते हैं।

  • आप टैक्स छूट का फायदा भी चाहते हैं (टैक्स सेविंग FD के जरिए)।

  • आपको नियमित ब्याज आय चाहिए (कुछ बैंक मासिक/तिमाही ब्याज भुगतान का विकल्प भी देते हैं)।
  • RD चुनें अगर:

  • आपके पास एक साथ बड़ी रकम नहीं है, लेकिन आप हर महीने थोड़ी बचत कर सकते हैं।

  • आप किसी छोटी अवधि के वित्तीय लक्ष्य के लिए बचत कर रहे हैं, जैसे 1-3 साल में कोई खरीदारी।

  • आप बचत करने की अनुशासित आदत बनाना चाहते हैं।

  • आप सैलरीड हैं और हर महीने अपनी आय का एक हिस्सा अलग रखना चाहते हैं।
  • क्या FD और RD एक साथ रखे जा सकते हैं?

    बिल्कुल। दरअसल कई वित्तीय सलाहकार दोनों को साथ इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपके पास पहले से कुछ बचत जमा है, तो उसे FD में लगाकर सुरक्षित रखें। साथ ही, अपनी मासिक आय में से एक हिस्सा RD में डालना शुरू करें, ताकि भविष्य में जब वह RD मैच्योर हो, तो उस राशि को फिर से FD में बदला जा सके। इस तरह से एक सतत बचत चक्र (saving cycle) बनाया जा सकता है, जो लंबी अवधि में एक मजबूत वित्तीय आधार तैयार करता है।

    FD और RD की तुलना — एक नजर में

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    निष्कर्ष

    FD और RD, दोनों ही सुरक्षित और भरोसेमंद बचत साधन हैं, जो जोखिम से दूर रहने वाले निवेशकों के लिए बनाए गए हैं। दोनों में से किसे चुनना है, यह पूरी तरह आपकी मौजूदा वित्तीय स्थिति और लक्ष्य पर निर्भर करता है। अगर आपके पास निवेश के लिए एकमुश्त रकम है, तो FD बेहतर विकल्प है। वहीं अगर आप हर महीने छोटी-छोटी बचत करके एक बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो RD ज्यादा उपयुक्त रहेगा।

    असल में यह सवाल "कौन बेहतर है" से ज्यादा "कौन आपकी जरूरत के हिसाब से सही है" का है। कई बार दोनों को एक साथ इस्तेमाल करना ही सबसे समझदारी भरा फैसला साबित होता है, क्योंकि इससे आपकी मौजूदा पूंजी भी सुरक्षित रहती है और भविष्य की नियमित बचत की आदत भी बनी रहती है।

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    नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है, इसे निवेश सलाह न समझा जाए। ब्याज दरें और टैक्स नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं, इसलिए निवेश से पहले संबंधित बैंक या पोस्ट ऑफिस से नवीनतम जानकारी जरूर लें, या किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।